Archive for October, 2009

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October 2, 2009

Woods are lovely dark and deep

But I have promises to keep

Miles to go before I sleep

Miles to go before I sleep

Robert Frost

सघन गहन मनमोहक वन तरु, मुझको आज बुलाते हैं
मगर किया जो वादे मैंने, याद मुझे आ जाते हैं
अभी कहाँ आराम बदा, यह मुक्त निमंत्रण छलना है
अरे अभी तो मीलों मुझको, मीलों मुझको चलना है|

हिंदी अनुवाद
सुभाष (NIT Jamshedpur)

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अशोक भैय्या अब कौन?

October 2, 2009

अशोक भैय्या अब कौन?

अब कौन बचायेगा हमें उनकी अदाओ मे घिरने से?
अब कौन बचायेगा हमें उनकी बाँहों मे गिरने से?
अब कौन हमें उन बालाओं के प्रेम-पाश से बचायेगा?
अब कौन प्रेम की अनसुलझी ये गूढ़ गुथ्थियाँ सुलझायेगा?

अशोक भैय्या अब कौन?
अब कौन हमें सलाह दे-देकर जूतों का भोज करायेगा?
अपना सपना पूरा करने के चाल हमसे चलाएगा?
अब कौन CTC की कूटनीति के पाठ हमें पढ़येगा?
तुम ना होगे कौन हमें सफल इंसान बनाएगा?

अशोक भैय्या तुम आ जाओ, हम निरीह मानुष बुलाते हैं
“with folded hands and weeping eyes” गुहार यही लगाते हैं
हो सकता है तुम ना आ पाओ, ये ” TUMMY” तुम्हे ना आने दे
COOLER की ठंढी हवा, रेडियो के गीत तुम्हे भरमा ना दे
पर है यकीन तुम आओगे, हम भक्तजनों के आँगन मे
थोडी शिक्षा कुछ पढ़ा लिखा घर जाकर खाना खाओगे

ब्रम्हांड टिकाये रहते थे तुम अपनी नाभि के ऊपर
उस गोल समग्र संसार को हम बस टुक-टुक ताका करते थे
उस ज्ञान-अन्न भण्डार को हम-सब कितना अब मिस करते हैं
तुम आ जाओ तो छु-भर लें और चरम तृप्त हो जाएँ हम.